रविवार, 30 दिसंबर 2012

नये साल में हैदराबाद के लिए नया संकट


 शनिवार, 29 दिसंबर, 2012 को 20:55 IST तक के समाचार
चारमीनार, हैदराबाद
शहर से जंगल और झील जैसे प्राकृतिक साधनों को बेदर्दी से मिटाया गया.
कहते हैं कि हर नव वर्ष अपने साथ नई उम्मीदें लाता है, लेकिन साल 2013 ऐसा लगता है कि हैदराबाद शहर के लिए एक गंभीर संकट साथ ला रहा है.
अगर आप नवाबों और मीनारों के शहर हैदराबाद के रहने वाले हैं तो फिर आपको नए साल में और भी ज्यादा कठिन और चुनौतियों से भरे जीवन के लिए कमर कस लेनी चाहिए.
अगर आप किसी दूसरे नगर से हैदराबाद आना चाहते हैं तो भी अपना इरादा टाल देना चाहिए, क्योंकि लगभग 80 लाख की आबादी वाला हैदराबाद पीने के पानी और बिजली के बेहद गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है.
हालांकि यह दोनों ही समस्याएं नगरवासियों के लिए नई नहीं हैं, लेकिन अधिकारी कह रहे हैं कि अब जो स्थिति उत्पन्न होने वाली है वैसी शहर ने पहले कभी नहीं देखी है.

मांगी थी एक दुआ

साल 1591 में इस शहर को बसाने वाले रजा मुहम्मद क़ुतुब शाह ने एक दुआ मांगी थी, ''ऐ खुदा, मेरे इस शहर को लोगों से ऐसे आबाद कर जैसे कि समंदर मछलियों से भरा है.''
शायद वो दुआ कुबूल होने की घड़ी थी. इस नगर की आबादी में कुछ इस गति से बढोत्तरी हुई कि आज हैदराबाद देश का छठवां बड़ा नगर बन गया है और जनसंख्या तेज़ी से एक करोड़ के निशाने की ओर बढ़ रही है.
लेकिन जाहिर है कि नगर की बुनियादी सुविधाएं विशेषकर सड़क, पानी और बिजली इतना बोझ उठाने के काबिल नहीं हैं. सड़कों पर तिल धरने को जगह नहीं. हर साल एक लाख वाहनों की बढोत्तरी सड़कों को और भी तंग बना रही है.
जहाँ कभी लगातार 24 घंटे नलों से पानी आता था, अब दो दिन में एक बार एक या दो घंटे के लिए आता है, वह भी अगर आपका भाग्य अच्छा हो.

यादें गुज़रे ज़माने की

मुझे बचपन के वो दिन याद हैं जब इन्हीं नलों से सुबह-शाम भरपूर पानी आया करता था और गर्मी के कड़े मौसम में भी पानी के लिए तरसना नहीं पड़ता था.
अगर घर में नल न हों, तब भी गली के नुक्कड़ पर लगा पब्लिक-नल सबकी प्यास बुझाता था. लेकिन अब न तो पब्लिक-नल रहे और न ही तालाबों में इतना पानी कि रोज़ाना उसकी आपूर्ति हो सके.
पहले पानी हिमायत सागर और उस्मान सागर से आता था जो मुसी नदी पर बने हैं. फिर मंजीरा नदी से पानी आया, बाद में कृष्णा नदी का पानी हैदराबाद पहुंचा और अब गोदावरी नदी का पानी लाने की परियोजना पर काम हो रहा है.
लेकिन इतनी धीमी गति से कि 30 वर्ष बाद भी यह अधूरा पड़ा है. शहर में रोज़ाना 460 मिलियन गैलन पानी की जरूरत है और केवल 340 मिलियन गैलन पानी की आपूर्ति हो रही है.
बुरी खबर यह है की फ़रवरी से इसमें और भी कमी होगी क्योंकि हिमायत सागर और उस्मान सागर सूखने लगे हैं.

तैयारी संकट की


पानी की कमी हैदराबाद की बड़ी समस्या है जिसका कोई समाधान अबतक नहीं हो पाया है.
मार्च या अप्रैल में मंजीरा नदी भी सूख जाएगी. जो लोग यह सोचकर दिल बहलाना चाहते हैं कि बोरवेल या कुंओं से काम चला लेंगे, उनके लिए बुरी खबर है कि भूमिगत पानी का स्तर भी गिरता जा रहा है क्योंकि शहर कंक्रीट का जंगल बन गया है.
बहुमंजिला भवनों और कंक्रीट की सड़कों के कारण बारिश का पानी भी भूमि में नहीं जा रहा है. नगर के कुछ इलाकों में तो 18 मीटर की गहराई पर भी पानी नहीं मिल रहा है.
ऐसी हालत में पीने को फिर भी कुछ गिलास पानी मिल जाए, लेकिन नहाना-धोना हैदराबाद के लोगों के लिए किसी विलासता से कम नहीं होगा.
पर्यावरण में भी कुछ ऐसा परिवर्तन आया है कि हर वर्ष गर्मी में तापमान एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है. जिस शहर में 30-40 वर्ष पहले 35 डिग्री सेल्सियस की हद पार होते ही बारिश हो जाती थी, अब तापमान 45 डिग्री पार कर जाना भी एक साधारण बात बन गई है.

मुश्किलें ही मुश्किलें

हैदराबादियों के लिए एक मुश्किल यह भी है कि वो इस झुलसाने वाली गर्मी से बचने के लिए एयर कंडिशन्ड कमरों या पंखों के नीचे भी शरण नहीं ले सकते. अगर 2012 में रोज़ाना चार घंटे बिजली की कटौती होती थी तो नए साल में यह बढ़कर छह घंटे हो सकती है.
अधिकारी कहते हैं कि बिजली का संकट जनवरी से ही गहराने लगेगा और अप्रैल तक राज्य में 4000 मेगावाट बिजली की अभूतपूर्व किल्लत होगी.
उद्योगों को तो सप्ताह में केवल तीन दिन बिजली मिलेगी और चार दिन छुट्टी करनी पड़ेगी. उद्योगपति नगर छोड़कर जाने की बात कर रहे हैं.
इसका राज्य की अर्थव्यवस्था पर जो असर पड़ेगा, वह तो स्पष्ट है ही, घरेलू उपभोक्ताओं पर जो बीतने वाली है, वह सोचकर अभी से पसीना आने लगा है.
किसी भी दूसरे बड़े नगर की तरह हैदराबाद में जंगल और झील जैसे प्राकृतिक साधनों को जिस बेदर्दी से मिटाया गया है, अब नगरवासियों को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ रहा है.

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बढ़ रहे हैं सोशल मीडिया से जुड़े अपराध


 सोमवार, 31 दिसंबर, 2012 को 08:05 IST तक के समाचार
Facebook
सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों में बढ़ोतरी
फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों की संख्या में पिछले चार वर्षों में लगभग आठ गुना बढ़ोतरी हुई है.
ब्रिटेन में पुलिस आंकड़ों के मुताबिक़ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में वर्ष 2012 के दौरान सोशल मीडिया से संबंधित अपराधों के कुल 4908 मामले सामने आए और इनमें 653 लोगों पर मुकदमा चला.
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों की संख्या में बढ़ोत्तरी ने एक नई चुनौती पेश की है.

दिशा-निर्देश

इंग्लैंड और वेल्स में सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए पिछले सप्ताह ही अंतरिम दिशानिर्देश जारी किए गए थे. इसकी वजह ये थी कि सोशल मीडिया से जुड़े कई विवादास्पद मामले सामने आए थे.
पॉल चैंबर्स का मामला 2010 में सुर्खियों में रहा था. चैंबर्स ने दक्षिण यार्कशायर के रॉबिन हुड हवाई अड्डे को उड़ाने की बात ट्विटर पर मज़ाक में कही थी.
इस पर उनके ख़िलाफ मुकदमा चला और सज़ा भी हुई, लेकिन इसकी व्यापक निंदा के बाद सज़ा को निरस्त कर दिया गया था.
"हमें इस बात को स्वीकार करने की जरूरत है कि लोगों को आपस में संवाद स्थापित करने का पूरा अधिकार है. फिर चाहे वे किसी भी तरह की बातें करें. पुलिस को इस मामले में उलझने की कोई जरूरत नहीं है"
सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों से संबंधित आंकड़े सूचना के अधिकार के तहत जारी किए गए हैं. चार साल पहले जब सोशल नेटवर्किंग से जुड़ी गतिविधियों का स्तर सीमित था, तब इससे जुड़े 556 मामले सामने आए थे और 46 लोगों पर मुकदमा चला था.
लेकिन इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर लगभग पाँच हज़ार तक पहुंच गया है और 653 लोगों पर मुकदमा चला है.

सोशल मीडिया के ख़तरे

मुख्य पुलिस अधिकारियों के संघ के चीफ कांस्टेबल एंडी ट्रॉटर ने कहा कि पुलिस सोशल नेटवर्किंग से जुड़े अपराधों को प्राथमिकता दे रही है क्योंकि ये सही मायनों में ख़तरनाक हैं.
उन्होंने कहा “हमें इस बात को स्वीकार करने की ज़रूरत है कि लोगों को आपस में संवाद स्थापित करने का पूरा अधिकार है. फिर चाहे वे किसी भी तरह की बातें करें. पुलिस को इस मामले में उलझने की कोई जरूरत नहीं है.”
Twitter
सोशल मीडिया में उत्पीडन और हिंसा के खतरे हैं
ट्रॉटर ने आगे कहा “लेकिन सोशल मीडिया में उत्पीडन और हिंसा के खतरे हैं. पुलिस को इस मामले में अपना ध्यान देने की जरूरत है.”
पुलिस बलों को फेसबुक और ट्विटर से जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी देने को कहा गया था. इनमें वेबसाइटों पर किए गए अपराधों को भी शामिल किया गया था जैसे अपमानजनक, डराने-धमकाने वाले संदेश भेजना और ऑनलाइन पोस्टिंग से हिंसा के लिए उकसाना.इसके अलावा यौन उत्पीडन के मामले, पीछा करने की शिकायतें, नस्ली भेदभाव संबंधी आरोप तथा धोखाधड़ी के मामले शामिल थे.
ग्रेटर मैनचेस्टर की पुलिस ने सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों में सबसे ज़्यादा 115 लोगों के ख़िलाफ कार्रवाई की. लंकाशायर की पुलिस ने कहा कि उन्हें जान से मारने की धमकी की छह शिकायतें मिली थीं.
ट्रॉटर ने कहा कि इनमें से कुछ अपराध तो ऐसे हैं जिन्हें सोशल मीडिया के बिना भी होना ही था. उन्होंने कहा “हमें अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान करना चाहिए. लेकिन सोशल नेटवर्किंग से जुड़े लोगों को खुद पर नियंत्रण रखना चाहिए.”

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बाल ठाकरे के बिना मुंबई कैसी ?

 

 


 सोमवार, 31 दिसंबर, 2012 को 07:33 IST तक के समाचार

बाला साहब ठाकरे मुंबई की राजनीति के उन चंद चेहरों में से हैं जिन्होंने राजनीति की दिशा तय की.
पिछले लगभग पचास सालों से बॉम्बे या मुंबई और बाल ठाकरे का नाम एक ही सांस में लिए जाता रहा, लेकिन 2013 ऐसा पहला साल होगा जब मुंबई के साथ बाल ठाकरे का नाम नही जोड़ा जा सकेगा.
इस साल उनकी मौत से पूरा मुंबई शहर सदमे में आ गया क्योंकि मुंबई और महाराष्ट्र में एक पूरी पीढ़ी बाल ठाकरे की तेज़ तर्रार राजनीति की आदी सी हो गयी थी.
कुछ उनसे खौफ खाते थे तो कुछ उनकी पूजा करते थे, लेकिन कोई उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था.
उन्होंने ही 1966 में शिव सेना की स्थापना की थी और तभी से वो मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति के बेताज बादशाह बने रहे. कभी चुनाव नहीं लड़ा लेकिन हमेशा सियासी अखाड़े में अपना मुकाम बना कर रखा.

विवादस्पद कद्दावर व्यक्तित्व

तो नए साल में कदम रखने पर बाल ठाकरे के एक इशारे पर पूरी तरह से बंद हो जाने वाला मुंबई शहर राहत की सांस लेगा या उनके क्लिक करें विवादास्पद लेकिन कद्दावर व्यक्तित्व को मिस करेगा?

कुछ लोगों का मानना है कि उद्धव ठाकरे अपने पिता जैसी लोकप्रियता कभी नहीं हासिल कर सकते.
उनके समर्थकों को उनकी कमी तो ज़रूर खलेगी लेकिन उनके विरोधी नेताओं को भी उनकी कमी का एहसास होगा.
कुछ लोगों का ख्याल है कि क्लिक करें उद्धव ठाकरे अपने पिता जैसी लोकप्रियता कभी नहीं हासिल कर सकते.लेकिन, उनके भतीजे राज ठाकरे को एक दबंग नेता माना जाता है.
जिस दिन से राज ठाकरे शिव सेना और बाल ठाकरे से बगावत कर के अलग हुए हैं उन्होंने अपनी सियासत को अपने चाचा की राजनीति के अंदाज़ में ढालने की कोशिश की है जिससे उन्हें सीमित सफलता मिली है.

राजनीतिक हलचल

क्लिक करें बाल ठाकरे अब नहीं रहे लेकिन महाराष्ट्र में साल 2013 में राजनीति हलचल की कमी नहीं होगी.
2014 में न सिर्फ संसद का चुनाव होगा बल्कि महाराष्ट्र विधान सभा का भी चुनाव होने वाला है. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठबंधन 1999 से विधान सभा का चुनाव जीतता चला आ रहा है.
इनकी कोशिश होगी चौथी बार चुनाव जीतने की.
सवाल है कि क्या बाल ठाकरे की अनुपस्थिति में शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी का गठजोड़ कांग्रेस और एनसीपी के गठजोड़ को ऐसा करने से रोक सकेगा? क्या बाल ठाकरे की मौत से उनकी पार्टी को चुनाव में हमदर्दी का वोट मिलेगा?
फिलहाल इन सवालों का जवाब ढूँढना मुश्किल है लेकिन साल 2013 में इनके संकेत ज़रूर मिलने लगेंगे.

मुंबई का विकास

पिछले दस सालों में दिल्ली शहर बुनयादी ढाँचे में मुंबई से काफी आगे निकल चुका है.

शिव सेना चाहती थी कि शिवाजी पार्क मे ही बाल ठाकरे की समाधि बने.
मेट्रो का जाल हो या फिर फ़्लाईओवरो का निर्माण दिल्ली मुंबई के मुकाबले कहीं अधिक विकसित हो चुकी है.
लेकिन बुनयादी ढाँचे के मैदान में साल 2013 मुंबई का साल होगा. तीन चरणों में तैयार होने वाले मेट्रो के पहले चरण का उद्घाटन मार्च में होने वाला है.
और इसी महीने में ही मोनो रेल भी चलने लगेगी. अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को शहर से जोड़ने वाला एक लम्बा फ्लाईओवर भी अगले साल के चंद महीनों में ट्रैफिक के लिए तैयार हो जाएगा.
मुंबई अगर दिल्ली से बुनयादी ढाँचे में पीछे है तो आर्थिक गतिविधियों में और शेयर बाज़ार की हलचल में उससे कहीं आगे.
पिछले दो सालों से शेयर बाज़ारों में कुछ अधिक उछाल देखने को नहीं मिला लेकिन शेयर दलाल को उम्मीद है कि 2013 में शेयरों में निवेश करके पैसे कमाने वालों के लिए अच्छा साल होगा

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शनिवार, 29 दिसंबर 2012

दिल्ली सामूहिक बलात्कार: दस अहम घटनाक्रम




 सोमवार, 24 दिसंबर, 2012 को 10:19 IST तक के समाचार
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इंडिया गेट पर भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच लोगों ने बढ़-चढ़कर विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है
दिल्ली में चलती बस में सामूहिक बलात्कार की घटना को एक हफ्ते से ज्यादा समय हो गया है. पीड़ित लड़की अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है.
पुलिस ने भले ही अभियुक्तों को पकड़ने का दावा किया है, पर लोग सड़कों पर उतर आए हैं और घटना के विरोध में प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. आइए डालते हैं इस नजर इस पूरे घटनाक्रम पर.

1- दिल्ली में 16 दिसम्बर रविवार की रात चलती बस में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. यह घटना उस वक्त हुई जब लड़की फिल्म देखने के बाद अपने पुरुष मित्र के साथ बस में सवार होकर मुनीरका से द्वारका जा रही थी.

2- लड़की के बस में बैठते ही लगभग पांच से सात यात्रियों ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी. उस बस में और यात्री नहीं थे. लड़की के मित्र ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उन लोगों ने उसके साथ भी मारपीट की और लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. बाद में इन लोगों ने लड़की और उसके मित्र को दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के नजदीक वसंत विहार इलाके में बस से फेंक दिया.

3- पीड़ित लड़की को नाजुक हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. घटना के विरोध में अगले ही दिन कई लोगों ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और ट्विटर के जरिए अपना गुस्सा ज़ाहिर करना शुरु किया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि बस के ड्राइवर को सोमवार देर रात गिरफ्तार कर लिया और उसका नाम राम सिंह बताया गया.

4- सामूहिक बलात्कार की घटना के क़रीब दो दिन बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने मीडिया को संबोधित किया और जानकारी दी कि इस मामले में चार अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि जिस बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, उस पर 'यादव' लिखा हुआ था और ये बस दक्षिण दिल्ली में आरके पुरम सेक्टर-3 से बस बरामद की गई. सुबूत मिटाने के लिए बस को धो दिया गया था.

5- ड्राइवर राम सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उसकी निशानदेही पर उसके भाई मुकेश, एक जिम इंस्ट्रक्टर विनय गुप्ता और फल बेचने वाले पवन गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया.

6- मंगलवार 18 दिसम्बर को इस मामले की गूंज संसद में सुनाई पड़ी जहां आक्रोशित सांसदों ने बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड की मांग की. गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने संसद को आश्वासन दिलाया कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे.

7- इस बीच पीड़ित लड़की की हालत नाज़ुक बनी है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. सड़कों और सोशल मीडिया से उठी आवाज़ संसद के रास्ते सड़कों पर पहले से कहीं अधिक बुलंद आवाज के साथ सड़कों पर उतरी और दिल्ली में जगह-जगह प्रदर्शन होने लगे.

8- दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि वो अस्पताल जाकर बस में बर्बर सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई उस पीड़ित लड़की को देखने जा सकें. हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सफदरजंग अस्पताल जाकर पीड़ित लड़की का हालचाल जाना. शीला दीक्षित ने ये भी कहा कि ज़रूरत पड़ने पर पीड़ित लड़की को इलाज के लिए विदेश ले जाया जाएगा.

9- दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि उसने इस मामले में सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन इससे आम लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ और शनिवार को रायसीना हिल्स पर हज़ारों लोग एकजुट हुए जिन्हें पुलिस ने तितर-बितर करने के लिए बल-प्रयोग किया.

10- शनिवार की घटना से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने रविवार के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी और निषेधाज्ञा लगाकर रोकने की कोशिश की. कड़कड़ाती सर्दी और कुछ मेट्रो स्टेशनों के बंद होने के बाद भी लोग रविवार को बड़ी संख्या में एक बार फिर इंडिया गेट पर जुटे. पुलिस ने एक बार फिर बल प्रयोग करके प्रदर्शनकारियों के हटाने का प्रयास किया लेकिन विरोध का सिलसिला जारी रहा.

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टॉपिक

प्रधानमंत्री जी......सब ठीक नहीं है...


 सोमवार, 24 दिसंबर, 2012 को 17:15 IST तक के समाचार

प्रधानमंत्री के ठीक है शब्दों ने उन्हें मजाक का पात्र बना दिया है.
दिल्ली में गैंग रेप मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आखिरकार बयान तो दिया लेकिन बयान के दो शब्दों ने उन्हें सोशल मीडिया ट्विटर पर मजाक का पात्र बना दिया है.
असल में हुआ यूं कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन के अंत में कहा...’ठीक है.’ शायद प्रधानमंत्री भाषण की रिकार्डिंग के बारे में पूछ रहे थे कि ठीक है या नहीं.....लेकिन ट्विटर पर लोगों ने इन दो शब्दों को पकड़ लिया.
अब ये दो शब्द यानी Theekhai सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है और लोगों के ट्विट्स पढ़ने लायक हैं.
रमेश श्रीवत्स @rameshsrivats: लिखते हैं: पुतिन- मेरे पास गाड़ी है बंगला है रुस है. तुम्हारे पास क्या है. मनमोहन-ठीक है.
जेबा Jeba ‏@Jeba लिखते हैं- प्रधानमंत्री के दफ्तर में वीडियो एडिटिंग का ये हाल है तो ....
"अब पता चला क्यों प्रधानमंत्री को महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जाता. वो चीज़ों को और ख़राब करते हैं. ठीक है. "
आयुष्या राठौड़ Aayushya Rathod ‏@Aayushya_Rathod लिखती हैं-
अब पता चला क्यों प्रधानमंत्री को महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जाता. वो चीज़ों को और ख़राब करते हैं. ठीक है.
राहुल देशपांडे का ट्विट है.Rahul Deshpande ‏@mastanabail एक शब्द कहना नहीं चाहूंगा पीएम के भाषण के बारे में. सब कुछ दो शब्द में सिमट सकता है. ठीक है.
पूर्णचंद्रन नायर Purnachandran Nair ‏@purnacool लिखते हैं – पीएम का भाषण और उनके हाव भाव लकड़ी जैसे हैं टीक की लकड़ी जैसे..ठीक है.
विची वुमनिया witchy womaniya ‏@oxymoronic_me लिखती हैं – मुझे सारे राजनेताओं को थप्पड़ मारने दीजिए...ठीक है.
सिद्धार्थ गुगनानी Sidharth Gugnani ‏@sidgugnani कहते हैं कि अगर कभी यस मिनिस्टर हिंदी में बना तो सबको पता है कि इसका नाम क्या होगा...ठीक है.
वन डायरेक्शन इंडिया One Direction India ‏@1DCrewIndia कहता है कि पीएम आप चुप थे तो ही बेहतर था...ठीक है.

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अपनों की बुरी नज़र का शिकार होती बेटियां




शनिवार, 29 दिसंबर, 2012 को 22:50 IST तक के समाचार
बलात्कार
बलात्कारियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग करते प्रदर्शनकारी
दो हफ़्ते पहले दिल्ली में एक चलती बस में एक 23 वर्षीय लड़की का बलात्कार करने वाले लोग भले ही उसकी जान-पहचान के न हों लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 10 में से नौ बलात्कारी पीड़िता के दोस्त या घर के लोग ही होते हैं.
ताज़ा खबरों के मुताबिक अपनों की बुरी नज़र का शिकार होने की दो घटनाएं राजस्थान में प्रकाश में आई हैं. एक ओर जहां जयपुर में पुलिस ने एक पिता को अपनी 13 साल की बेटी के बलात्कार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. वहीं कोटा में एक जीजा को अपनी नाबालिग साली के साथ बलात्कार करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है.
राजस्थान की इन दोनों घटनाओं को छोड़ दें तो नज़दीकी रिश्तेदारों के हाथों यौण शोषण के मामले सामने नहीं आ पाते हैं.
विशेषज्ञ कहते हैं कि बलात्कार के अधिकतर मामले पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज़ किए ही नहीं जाते. फिर भी दर्ज़ किए गए अपराधों में बलात्कार का अपराध दूसरे ज़ुर्मों के मुकाबले सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है.
चिंता की बात यह है कि इसमें सज़ा दूसरे अपराधों की तुलना में सब से कम हो रही है.

सरकार कहती है

"प्रदर्शकारियों की भावनाएं सही हैं. सज़ा कड़ी से कड़ी होनी चाहिए लेकिन मेरे विचार में नए कानून बनाने की ज़रुरत नहीं. ज़रुरत है कानून को अधिक मज़बूत करने की और पुलिस को सही ट्रेनिंग दिए जाने की."
रविकांत, शक्तिवाहिनी संस्था
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010 में बलात्कार के 20,262 मुकदमे दर्ज़ किए गए जबकि 2011 में इस से चार हज़ार ज़्यादा.
आंकड़ों पर नज़र डालें तो बलात्कार के मामलों में मध्य प्रदेश सब से आगे है. पिछले साल राज्य में बलात्कार के 3,406 मुक़दमे दर्ज किये गए थे. अगर शहरों की बात करें तो वर्ष 2011 में बलात्कार के 507 मामलों के साथ दिल्ली सबसे आगे रही. उसी साल मुंबई में 117 मुक़दमे दर्ज किये गए.
पीड़ितों के बीच काम करने वाली संस्था शक्ति वाहिनी के अध्यक्ष रवि कांत कहते हैं कि बलात्कार के मामले तेज़ी से इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि पुलिस वालों और पुलिसिंग दोनों में कई खामियां हैं.
वह कहते हैं, "पुलिस महकमे को महिलाओं पर अत्याचार के प्रति संवेदनशील बनाने की ज़रुरत है. जांच की खामियों को दूर करना होगा व कानून को और मज़बूत करना होगा"

कड़ी सज़ा की मांग

बलात्कार, विरोध
बलात्कार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है
दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोग बलात्कार के अपराधियों को मृत्युदंड देने की मांग कर रहे हैं. लेकिन रवि कांत जो खुद भी एक वकील हैं, कहते हैं कि ज़रुरत इस इस बात की है कि मौजूदा कानून को ही और सशक्त बनाया जाए.
वह कहते हैं, "प्रदर्शकारियों की भावनाएं सही हैं. सज़ा कड़ी से कड़ी होनी चाहिए लेकिन मेरे विचार में नए कानून बनाने की ज़रुरत नहीं. ज़रुरत है कानून को अधिक मज़बूत करने की और पुलिस को सही ट्रेनिंग दिए जाने की."
दिल्ली में 23 वर्षीय लड़की के साथ हुए बलाता्कार और उसकी मौत के बाद रेप जैसे अपराध पर देश भर में बहस छिड़ी हुई है. बलात्कारियों को मौत की सज़ा दिलाने की बात की जा रही है.
लेकिन कुछ समाज सेवकों का यह तर्क है कि कानून से बलात्कार जैसे अपराध को रोकने की कोशिश से ज़्यादा जरूरत इस बात की है कि लोगों की मानसिकता बदली जाए.
रवि कांत कहते हैं दोनों पहलुओं पर ज़ोर देना ज्यादा उचित होगा. "कानून को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज की औरतों के प्रति मानसिकता बदलने की भी कोशिश करनी होगी".
शायद इसी लिए दिल्ली की युवती के खिलाफ बलात्कार पर प्रदर्शनों के बावजूद पिछले दस दिनों में बलात्कार की घटनाएं अब भी घट रही हैं।

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तेलंगाना: क्या एक माह में हल सामने होगा ?

 शुक्रवार, 28 दिसंबर, 2012 को 13:42 IST तक के समाचार
तेलंगाना आंदोलन

आंध्र प्रदेश में पृथक तेलंगाना राज्य की माँग को लेकर कई सालों से आंदोलन चल रहा है
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दावा किया है कि आंध्र प्रदेश के बँटवारे और पृथक तेलंगाना राज्य की साठ साल पुरानी माँग पर एक माह में अंतिम फ़ैसला हो जाएगा.
शिंदे ने शुक्रवार सुबह दिल्ली में हुई ‘अंतिम’ सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारो के सामने यह घोषणा की.
इस बैठक में आंध्र प्रदेश के आठ मुख्य राजनैतिक दलों के दो-दो प्रतिनिधियों ने भाग लिया. यूं तो ज्यादातर निगाहें आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के रुख पर थीं, लेकिन शिंदे ने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया. शिंदे ने आंध्र के विरोधियों और समर्थकों को शांत रहने को कहा और दावा किया किया जो भी हल निकाला जाएगा वो सबको शांति देगा.
कांग्रेस आलाकमान इस मामले में बहुत फूँक-फूँक कर कदम उठा रहा है. इस सन्दर्भ में पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से गुरुवार को भेंट भी की थी.

उम्मीद

आमतौर पर इस बैठक से किसी नाटकीय परिणाम की उम्मीद नहीं की जा रही है. अलग राज्य के लिए लड़ने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि यह बैठक कांग्रेस का एक खेल है.
उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने यह बैठक केवल इसलिए बुलाई है कि उसे एफडीआई के मुद्दे पर संसद में मतदान के दौरान पराजय का डर था और वो तेलंगाना के कांग्रेसी सांसदों को खुश करना चाहती थी."
पार्टी की पोलित ब्यूरो में इस सवाल पर काफी बहस हुई कि पार्टी का रुख क्या होना चाहिए. लेकिन इसकी सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई.
कहा जा रहा है कि पहले कांग्रेस पार्टी और केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना होगा.
इससे पहले तेलुगुदेशम के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू कह चुके हैं कि उनकी पार्टी तेलंगाना की विरोधी नहीं है.
खुद कांग्रेस के अन्दर इस मुद्दे पर गंभीर प्रांतीय मतभेद चले आ रहे हैं. तेलंगाना के नेता अलग राज्य चाहते हैं और आंध्र और रायलसीमा के नेता उसका विरोध कर रहे हैं.
तेलंगाना से कांग्रेस के सांसद पुनम प्रभाकर ने चेतावनी दी है की अगर इस बैठक में तेलंगाना के पक्ष में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और तेलंगाना की जनता कांग्रेस को उखाड़ फेंकेगी.

शिंदे ने दावा किया किया जो भी हल निकाला जाएगा वो दोनों पक्षों को शांति देगा.
कांग्रेस के तेलंगना सांसद पहले ही कह चुके हैं कि अगर पार्टी तेलंगाना के पक्ष में फैसला नहीं करती है तो वो पार्टी छोड़ देंगे.
तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तेलंगाना राज्य के पक्ष में हैं जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन उसका विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस की ही तरह वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है.

चेतावनी

इस बीच तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक प्रोफेसर कोदंडा राम ने चेतावनी दी है कि जो भी राजनैतिक दल इस बैठक में तेलंगाना के विरुद्ध बात करेगा उसके लिए इस क्षेत्र में कोई जगह नहीं होगी और जनता उसका सफाया कर देगी.
साल 2009 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर रही है. लेकिन जब इसके बाद आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के सौ से ज्यादा विधायकों ने त्यागपत्र दे दिया तो केंद्र को अपना रुख बदलना पड़ा और उसने श्री कृष्णा समिति का गठन किया.
कई महीनों के काम के बाद इस समिति ने केंद्र सरकार को पेश की गई अपनी रिपोर्ट में तेलंगाना राज्य स्थापित न करने की सिफारिश की. इसके बाद क्षेत्र में चल रहा आन्दोलन और भी तेज़ हो गया.
कांग्रेस और केंद्र सरकार की टालमटोल की नीति ने उसे इस क्षेत्र में कितना अलोकप्रिय बना दिया है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि गत तीन वर्षों में वो इस क्षेत्र में कोई उप चुनाव नहीं जीत सकी है.

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